Badhaai Do Review

Badhaai Do Review : राजकुमार राव (Rajkummar Rao) भूमि पेडनेकर (Bhumi Pednekar) की फिल्म ‘बधाई दो’ (Badhaai Do) थियेटर्स में रिलीज हो गई है, ऐसे में अगर आप भी इस वीकेंड अफने परिवार, दोस्तों और किसी खास के साथ ये फिल्म देखने जाना (Badhaai Do Review in Hindi) चाहते हैं, तो आइए इसके पहले जान लेते हैं फिल्म का रिव्यू।

बता दें कि ये फिल्म साल 2018 में आई नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्म बधाई हो (National Award Winning Film Badhaai Ho) का सीक्वल है, बधाई हो की कहानी ओल्ड एज प्रग्नेंसी (Old Age Pregnancy) पर आधारित थी। वहीं, बधाई दो में गे और लेस्बियन किरदारों (Gay And Lesbian Characters) की चुनौती पर बात करती है।

Badhaai Do Review : क्या है कहानी और स्टोरीलाइन 

सुमि (Bhumi Pednekar) एक पीटी टीचर (PT Teacher) है और शार्दुल (Rajkumar Rao) एक पुलिस ऑफिसर इससे अलग दोनों की पहचान है कि वे समलैंगिक (Gay) हैं। दोनों उत्तराखंड के ऐसे परिवारों से ताल्लुक रखते हैं, जहां वे समाज में खुलकर अपनी सेक्शुएलिटी (Sexuality) जाहिर नहीं कर सकते हैं। शार्दुल और सुमि दोनों पर ही उनके (Badhaai Do Review) परिवार वाले शादी के लिए बहुत ज्यादा दबाव बना रहे हैं। अंत में दोनों आखिरकार शादी के लिए राजी हो जाते हैं।

हालांकि, ये एक समझौते वाली शादी होती है। हालांकि, दोनों शादी की (Badhaai Do Full Review In Hindi) आड़ में अपनी पसंद के पार्टनर के साथ जिंदगी बीताएंगे। शार्दुल, सुमि को तैयार करता है और शादी हो भी जाती है, लेकिन इसके बाद घरवाले बच्चे (Badhaai Do Review in Hindi) पैदा करने का दबाव डालने लगते हैं। अब क्या सुमी और शार्दुल समाज के चक्रव्यूह को भेदकर अपना सच सामने ला पाएंगे, यदि हां तो किस तरह से ये सब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

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