देश में कोरोना वायरस की दूसरी अत्यधिक खतरनाक लहर पर अब धीरे-धीरे काबू पाया जा रहा है। ज्यादातर राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। साथ-साथ टीकाकरण (वैक्सीनेशन) अभियान भी युध्स्तर पर जारी है। देश में फिलहाल कोविशील्ड, कौवैक्सीन और स्पुतनिक V वैक्सीन लोगों को लगाई जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही कुछ और कम्पनियों की वैक्सीन इस अभियान को और तेजी देंगे। ऐसे में खबर आ रही है कि वैक्सीन के साइड इफेक्ट की खबरें भी कई बार सुनने को मिलती रहती हैं। इन सबके बीच देश में कोरोना की वैक्सीन से मौत का पहला मामला सामने आया है। देश में कोविड-19 वैक्सीन के संभावित साइड इफेक्ट्स पर स्टडी कर रहे एक सरकारी पैनल ने वैक्सीन के चलते एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि की है। कोरोना वैक्सीन के चलते भारत में यह पहली मौत की पुष्टि की हुई है। सरकारी समिति AEFI द्वारा पेश की गयी एक रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है। AEFI यानी एडवर्स इवेंट्स फॉलोइंग इम्युनाइजेशन एक ऐसी सरकारी संस्था है, जो वैक्सीन लगवाने के बाद व्यक्ति में होने वाले विपरीत असर की निगरानी करती है।

AEFI पैनल के चेयरमैन डॉ. एन के अरोड़ा ने इस बारे में न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि एक बार फिर से हम यही सलाह देंगे कि वैक्सीन लगवाने के 30 मिनट बाद तक वैक्सीनेशन सेंटर पर ही रहें। इसी अवधि में कई बार साइड-इफेक्ट्स देखे जाते हैं और उसके बाद तत्काल इलाज मिलने पर उसे आसानी से काबू किया जा सकता है। AEFI की रिपोर्ट के अनुसार पैनल ने अभी तक 31 सीरियस मामलों का मूल्यांकन किया गया था, इसमें 28 लोगों की मौत हुई थी। आपको बताते चलें कि देश में जबसे टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत हुई है तब से यह सभी 31 मामले सीरियस आए हैं। इन पर कमिटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है। AEFI समिति के सलाहकार डॉ अरोड़ा ने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार इन सब 28 मौत में से 1 मौत वैक्सीन लेने की वजह से हुई है। उन्होंने बताया कि लगभग 31 सीरियस मामलों में से 18 मामले आकस्मिक रहे, जिनका वैक्सीन लेने से कोई नाता नहीं रहा है। उधर, भारत में मंगलवार को कोरोना संक्रमण के 60,471 नए मामले दर्ज किये गए और इस दौरान 2,726 लोगों की इस संक्रमण से मौत हो गई। बीते कई हफ्तों से लगातार भारत में कोरोना के मामलों में लगातार गिरावट दर्जकी जा रही है। दूसरे लहर की चरम में यानी मई की शुरुआत में प्रतिदिन दर्ज होने वाले मामले 4 लाख के पार हो चुके थे, जो अब धीरे-धीरे 60,000 के आस-पास आ गए हैं।

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