गर्दन दर्द का भी सीधा संबंध हमारी दिनचर्या और जीवनशैली से है। लेकिन अपनी जीवनशैली से जुड़े छोटे-छोटे बदलावों की मदद से इस दर्द पर जीत हासिल की जा सकती है। गर्दन दर्द का भी सीधा संबंध हमारी दिनचर्या और जीवनशैली से है। लेकिन अपनी जीवनशैली से जुड़े छोटे-छोटे बदलावों की मदद से इस दर्द पर जीत हासिल की जा सकती है। हम सबने कभी न कभी गर्दन के तेज दर्द का सामना किया है। यह दर्द गर्दन के इर्द-गिर्द मौजूद मांसपेशियों, टेंडन और लिगामेंट जैसे सॉफ्ट टिश्यू से पनपता है। इन सॉफ्ट टिश्यू पर दबाव का कारण लंबे समय से मौजूद गठिया या स्पाइनल स्टेनोसिस हो सकता है, वहीं कई बार इसका कोई साफ कारण तक नहीं होता है। गर्दन दर्द का कारण कुछ भी हो, इन तरीकों को अपनाकर आप अपने दर्द पर काबू पा सकती हैं।

सही तकिये का करें इस्तेमाल

सबसे बेहतर तकिया वही होता है, जो सोते वक्त हमारी रीढ़ की हड्डी को उसके प्राकृतिक आकार में रखता है। कई लोगों को फ्लैट तकिये पर सोने से आराम मिलता है, तो कई लोगों को बीच में गड्ढे वाले ऑर्थोपेडिक तकिये पर सोने से आराम मिलता है। वहीं कई लोगों को साइड में तकिये की सपोर्ट के साथ सोना मदद करता है, यानी आप अपने सोने के पोस्चर और अपने आराम के हिसाब से तकिया चुन सकती हैं।

कमर के बल सोएं

आमतौर पर कमर के बल सोने से हमारी पूरी रीढ़ की हड्डी को आराम मिलता है। गर्दन का दर्द झेल* रहे कई लोग अपने दोनों हाथों के नीचे तकिया रख कर सोते हैं, जिससे कि गर्दन पर पड़ने वाला दबाव कम हो जाए। स्पाइनल आर्थराइटिस या स्टेनोसिस के मरीज अकसर तकिये को टेढ़ा रख कर सोते हैं, जिससे उनके गर्दन की मांसपेशियों को आराम मिल सके। अगर आप साइड होकर सोती हैं, तो ध्यान रखें कि आपका तकिया 4-6 इंच से अधिक मोटा न हो, ताकि आपकी गर्दन या सिर जरूरत से ज्यादा न मुड़े।

कंप्यूटर के मॉनिटर को आई लेवल पर रखें

लैपटॉप पर लंबे वक्त तक काम करते रहने से अकसर लोगों को गर्दन में दर्द की शिकायत होती है। ऐसे में ये ध्यान में रखने की जरूरत है कि आपके कंप्यूटर का मॉनिटर आपके आई लेवल पर हो। ये जांचने के लिए मॉनिटर के सामने सीधे बैठ कर पहले अपनी आंखें बंद कर लें और फिर आंख खोल कर देखें कि मॉनिटर का सेंटर आपके आई लेवल की सीध में है या नहीं। अगर ऐसा है तो आपका मॉनिटर एकदम ठीक है, वरना आपको इसमें बदलाव करने होंगे।

मोबाइल से बनाएं दूरी

मोबाइल का लंबा इस्तेमाल और खासकर गर्दन नीची करके मोबाइल की ओर लंबे वक्त तक देखते रहने से बचें। अगर आप गर्दन के दर्द से परेशान हैं तो पहली बात तो मोबाइल का इस्तेमाल कम-से-कम करें। जब बहुत जरूरी हो, मोबाइल का इस्तेमाल उसी वक्त सिर्फ करें और गर्दन झुकाकर मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करें। कई लोगों के लिए फोन का लम्बे वक्त तक इस्तेमाल एक मजबूरी है, जिसे वो चाह कर भी रोक नहीं सकते। ऐसे में हेडसेट के इस्तेमाल से गर्दन पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सकता है।

गर्दन के लिए एक्सरसाइज करें

गर्दन के दर्द को कम करने के लिए इसके आसपास मौजूद मांसपेशियों को मजबूत करना होगा, जिसके लिए नियमित व्यायाम से बेहतर कोई तरीका नहीं हो सकता है। नियमित कसरत के जरिये इन मांसपेशियों को मजबूत किया जा सकता है और साथ ही पोस्चर को सही रखने में, भी मदद मिल सकती है। इसके अलावा इससे गर्दन और कंधों के बीच मौजूद मांसपेशियों के एंगल को भी ठीक रखा जा सकता है।

सही मात्रा में पानी पिएं

हमारे स्पाइन के बीच मौजूद डिस्क का हमारे पोस्चर और हमारी गर्दन पर सीधा असर पड़ता है। इन डिस्क में पानी की बड़ी मात्रा होती है और अगर शरीर में पानी की सही मात्रा न हो तो इस से इन डिस्क पर उसका नकारात्मक असर पड़ता है। इसलिए आवश्यक है कि दिन में कम से कम सात से आठ गिलास पानी पिया जाए और इसके अलावा जब कभी शरीर में पानी की कमी महसूस हो, तब तुरंत पानी पिया जाए। आप जब कभी बाहर जाएं तब अपने साथ पानी की बोतल जरूर रखें।

बराबर वजन उठाएं

अधिकतर लोग कोई भारी वजन उठाते किसी एक तरफ अधिक जोर डालने की गलती करते हैं। इसका सीधा असर गर्दन की मांसपेशियों पर पड़ता है और दर्द बढ़ जाता है। आप कभी भी अगर कोई भारी सामान उठाएं तो इस बात का ध्यान दें कि दोनों कंधों पर बराबर ही दबाव पड़े।

ये व्यायाम आएंगे काम

शरीर को सीधा रखें और ठोड़ी को आगे की ओर बढ़ाएं। हल्के से अपनी गर्दन की मांसपेशियों को तनाव दें और उस स्थिति में 5 सेकेंड रहें। अपने सिर को केंद्र में लाएं और गर्दन को पीछे की ओर पांच सेकंड तक रखें। इस अभ्यास को 5 बार दोहराएं। अपने सिर को इस सीमा तक झुकाएं कि आप अपनी छाती को ठोड़ी से छू सकें। धीरे धीरे अपनी गर्दन की मांसपेशियों को तनाव दें और उस स्थिति में 5 सेकेंड रहें। इस अभ्यास को 5 बार दोहराएं। आप अपने सिर को अपने कंधे की ओर झुकाते हुए अपने कान के साथ आगे बढ़ते हैं। धीरे-धीरे अपनी गर्दन की मांसपेशियों को तनाव दें और उस स्थिति में 5 सेकेंड तक रहें और फिर दूसरी तरफ इस व्यायाम को दोहराएं।

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