देश के प्रथम नागरिक महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज यानि रविवार सुबह अपने पैतृक गांव परौंख पहुंचे। राष्ट्रपति हैलीपैड से जैसे ही अपने गांव में उतरे, सबसे पहले उन्होंने झुककर अपनी मातृभूमि की मिट्टी को माथे से लगाया और आदरपूर्वक नमन किया। यह क्षण बिल्कुल भावुक कर देने वाला पल था। आपको बता दें कि देश के राष्ट्रपति बनने के लगभग चार साल बाद महामहिम रामनाथ कोविंद ने पहली बार अपने पैतृक गांव का दौरा किया है।

महामहिम राष्ट्रपति ने कहा-कभी नहीं सोचा था कि राष्ट्रपति बनूंगा

राष्ट्रपति के साथ राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी इस सुअवसर पर मौजूद थीं। गांव पहुंचकर देश के प्रथम नागरिक महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी पत्नी सविता के साथ पथरी देवी मंदिर के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा की। मंदिर के मुख्य पुजारी कृष्ण कुमार बाजपेयी ने विधिवत पूजा संपन्न कराई। कानपुर देहात में आयोजित एक अभिनंदन समारोह में राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, मैंने सपने में भी कभी नहीं सोचा था कि मेरे जैसे ग्रामीण परिवेश के एक साधारण लड़के को देश के सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी निभाने का सौभाग्य मिलेगा। लेकिन हमारी मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था ने इसे संभव बना दिया है।

मैं आज जिस सर्वोच्च पद पर काबिज़ हूं, इसका श्रेय इस परौंख गांव की मिट्टी और आप सभी के प्यार और आशीर्वाद को को जाता है। राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण 15 साल इसी गांव में बिताए। जन्मभूमि का गौरव स्वर्ग से भी कहीं ज्यादा होता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन में केवल राष्ट्रपति का नहीं अपितु देश के हर वासी को वहां आने का अधिकार है। उन्होंने अपने गांव वालों से कहा कि दिल्ली आएं तो मैं यह कोशिश अवश्य करूंगा कि आप सब राष्ट्रपति भवन को करीब से देखें। उन्होंने अगले वर्ष के फिर से आने के वादे के साथ अपना अभिभाषण समाप्त किया।

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