The Family Man 2 Review

The Family Man 2 Review : फैमिली मैन के पहले सीजन ने जिस तरह का ड्रामा दर्शकों को परोसा गया, वह हर किसी को पसंद आया। अपनी ऑड‍ियंस के इस उम्मीद और भरोसे को निर्माता-निर्देशक राज-डीके ने द फैमिली मैन 2 में भी बरकरार रखा है। इस एकदम नये सीजन में एक्शन और कॉमेडी तो है ही लेक‍िन इस बार सीरीज में एक नई कहानी पेश की गयी है जिसके सम्बन्ध पिछले सीजन के आतंकवादी मिशन से जुड़े हैं।

पहले सीजन के सभी मुख्य कलाकारों के अलावा इस नये सीजन में दक्षिण भारतीय अभिनेत्री सामंथा अक्क‍िनेनी भी नजर आई। तो चलिए जानते हैं कैसा है द फैमिली मैन 2 का नया कारवां, क्या नया रहा इस सीजन में और क्या अब इस सीरीज का अंत हो चुका है।

The Family Man 2 Review : कथा-पटकथा 

नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी में काम करने वाला एक अधिकारी श्रीकांत तिवारी (मनोज बाजपेयी) अब चेंज हो गया है। उसने नौकरी छोड़ एक आईटी फर्म ज्वॉइन कर ली है। वो अब अपने बच्चों और पर‍िवार के साथ समय बिताता है। पत्नी सुचि‍ (प्र‍ियामण‍ि) से मधुर सम्बन्ध रखने की पूरी कोश‍िश करता है। अब श्रीकांत देश सेवा की वर्दी उतारकर पार‍िवार‍िक वातावरण में खुद को ढालने का हर संभव प्रयास कर रहा है। लेक‍िन उसके अंदर कहीं न कहीं अभी भी देश सेवा की भावना भरी पड़ी है।

एक घटना के बाद श्रीकांत (The Family Man 2 Review) आख‍िरकार आईटी कंपनी को छोड़ वापस नेशनल सिक्योरिटी के सीक्रेट एजेंसी को ज्वॉइन कर लेता है। पर इस बार के मिशन में श्रीकांत का पर‍िवार भी दुश्मनों के राडार पर है। ऐसे में क्या श्रीकांत अपने मिशन के साथ-साथ फैमिली की हिफाजत कर पाएगा? मिशन कम्पलीट करने और अपने पर‍िवार को बचाने के लिए श्रीकांत को क्या बलिदान देनी होगा ? द फैमिली मैन का दूसरा सीजन गुरुवार, 3 जून को अमेजन प्राइम पर रिलीज कर दिया गया है।

द फैमिली मैन सीरीज के मेकर्स राज निदिमोरु और कृष्णा डीके ने दर्शकों को बेहतरीन कहानी परोसने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। जहां पिछली बार श्रीकांत तिवारी तिवारी और उनकी ख़ुफ़िया एजेंसी (The Family Man 2 Review) की लड़ाई सिर्फ आतंकवाद‍ियों से थी। इस बार उनका सामना एक तमिल-श्रीलंकन बागी सरकार से भी है, जो खुद को क्रांतिकारी समझते हैं। इस गुट में कई ऐसे सदस्य हैं जो अपनी सरकार को पॉवर में लाने के लिए जान की कुर्बानी तक देने को तैयार हैं।

इन्हीं में एक मह‍िला बागी भी है राजी (सामंथा अक्‍क‍िनेनी),जो अकेले ही कई लोगों को निपटाने में सक्षम है। उसे हाथ-पैर और बंदूक चलाने के अलावा हवाई जहाज तक चलाने की ट्रेन‍िंग मिली हुयी है। लक्ष्य को पूरा करने की सारी जिम्मेदारी उसके कंधों पर है। प्राइम मिनिस्टर बसु (The Family Man 2 Review) और श्रीलंकन राष्ट्रपति द्वारा दोनों देश के बीच एक समझौते का करार होना है।

इसके लिए श्रीलंका की सरकार उस बागी समूह के एक खास सदस्य की मांग करती है। प्रधानमंत्री इसके लिए अपनी स्वीकृति देती हैं और फिर उस बागी गुट के सदस्य को खोजने का काम ख़ुफ़िया एजेंसी को सौंप दी जाती है। उस बागी गुट के सदस्य को एजेंसी ढूंढ लेती है पर उसे श्रीलंकन सरकार को हैण्डओवर से पहले एक बम धमाके में उसकी मृत्यु हो जाती है।

इस मौत के बाद उसका भाई जो कि बागी गुट का नेता है, बौखला जाता है और अपनी सत्ता स्थापित करने में आतंकवादी समीर (The Family Man 2 Review) से हाथ मिला लेता है। दिलचस्प बात तो ये है कि समीर ने ही उसके बागी भाई की जान ली है जिसकी भनक उनके अलावा किसी को भी नहीं है।बागी गुट का लीडर अपने भाई की मौत का बदला लेने और अपनी सरकार को सक्र‍िय करने के लिए अपने लोगों को मिशन पर लगा देता है। इस मिशन का मकसद प्रधानमंत्री बसु और श्रीलंका के राष्ट्रपति की मुलाकात को मौत के भयानक मंजर में बदलने का है।

इसके लिए वे जिस तकनीक का प्रयोग करते हैं वह बहुत ही खतरनाक और गुप्त होता है। यह तकनीक सिर्फ राजी को पता है जिसे विमान भी उड़ाने की ट्रेन‍िंग मिली है। सांवला रंग-रूप, चेहरे पर शांत पर आक्रोश‍ित हाव-भाव पुरुषों की ज्यादती सहती राजी, चेन्नई में एक छोटी सी फैक्ट्री में काम करती है। वह अपनी हकीक़त छुपाकर रह रही है जो कि बस उस दिन का इंतजार कर रही है जब उसके बागी भाई-बहनों की मौत का बदला लिया जा सके। मिशन के ऐलान के बाद राजी वापस अपने बचे हुए बागी साथ‍ियों से मिलती है और कार्य को पूरा करने में लग जाती है।

वहीं दूसरी तरफ श्रीकांत अब एक कंपनी में काम करने लगा है। पत्नी और बच्चों के सामने अपनी अच्छी छव‍ि बनाने की कोश‍िश कर रहा है। लेक‍िन उसके मन में अब भी एजेंसी में चल रहे म‍िशन को जानने की जिज्ञासा रहती है। वह अपने साथी जेके से हर म‍िशन की जानकारी लेता है, साथ ही उनकी मदद भी कर देता है। पत्नी के जन्मदिन के अवसर पर सुच‍ि के साथ उसकी बहस हो जाती है और गुस्से में सुच‍ि कह देती है कि बेहतर था कि श्रीकांत अपने पुराने काम में वापस लौट जाता।

श्रीकांत श्रीकांत को तो जैसे मन मांगी मुराद बिना कहे मिल गई। दूसरे दिन वह कंपनी छोड़ देता है और वापस एजेंसी ज्वॉइन कर लेता है। लेक‍िन श्रीकांत तिवारी के लिए प्रधानमंत्री बसु और श्रीलंका के राष्ट्रपति की सफल मुलाकात करवाना इतना आसान नहीं है। वे श्रीकांत (The Family Man 2 Review) की बेटी को अगवा कर लेते हैं।

अब जहाँ एक ओर श्रीकांत के समक्ष देश सेवा के लिए चेन्नई में अपने लक्ष्य को पूरा करने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी ओर मुंबई में अपनी बेटी को आतंकवाद‍ियों के कैद से बचाना। दोनों के तार एक दूसरे से जुड़े हैं पर श्रीकांत के लिए कौन कितनी महत्ता रखता है यह जानने के लिए आपको ये वेब सीरीज देखनी पड़ेगी। जहाँ एक तरफ एक पिता की मज़बूरी है और दूसरी ओर देश का फर्ज। श्रीकांत इन दोनों में से किसे बचाएगा और किसकी कुर्बानी देगा?

एक्ट‍िंग

पहले सीजन में हमने जिस श्रीकांत तिवारी को देखा था, वो अभी भी नहीं बदला है। हां, उसका काम जरूर बदला है पर दिल तो अभी भी वतन के लिए ही धड़कता है। श्रीकांत के रोल में मनोज बाजपेयी दर्शकों की उम्मीदों पर एकदम खरे उतरे है। अपने गुस्से को हल्के हास्य अंदाज में जाह‍िर करने का उसका तरीका अब भी नहीं बदला। सामंथा अक्क‍िनेनी ने अपने किरदार राज़ी के साथ पूरा न्याय किया है। कैसे एक शांत नारी सी दिखने वाली मह‍िला खूंखार,कठोर और निर्दयी बन जाती है, इसे राजी ने बखूबी दिखाया है।

सीरीज की मांग के अनुसार राजी को शो में हर समय चेहरे पर एक सपाट भाव लेकर चलना था जो कि सामंथा ने बहुत बारीकी से पेश किया है। श्रीकांत तिवारी के किरदार में मनोज बाजपेयी तो राजी के रूप में सामंथा बिल्कुल फिट नजर आए हैं।

सीरीज के मुख्य किरदारों में इस बार श्रीकांत की बेटी धृति (अश्लेषा ठाकुर) को भी अहम रोल मिला है। अपने चिरचिरे स्वभाव को अश्लेषा ने भी बहुत ही शानदार तरीके से निभाया है। शो के अन्य किरदार के रूप में प्र‍ियामण‍ि, सनी हिंदुजा, शरद केलकर, शार‍िब हाशमी, सीमा बिस्वास, द‍िलीप ताह‍िल, शाहाब अली, वेदांत सिन्हा समेत अन्य कलाकारों की भी तारीफ बनती है।

निर्देशन

डायरेक्टर राज और डीके के निर्देशन की दाद देनी पड़ेगी। द फैमिली मैन ने तो लोगों के दिल में अपनी एक खास जगह बनायीं ही थी, द फैमिली मैन 2 भी नई कहानी से (The Family Man 2 Review) दर्शकों को रिझाती है। दिलचस्प बात ये है कि निर्देशकों ने सीरीज के इस मिशन के खत्म होते होते एक नए मिशन के आगाज़ का हिंट दे दिया है। यानि कि द फैमिली मैन 2 के बाद इसका तीसरा सीजन भी दर्शकों को देखने को मिलेगी। इस बार कहानी कुछ और होगी, जिसकी एक छोटी सी झलक दूसरी सीरीज के अंत में दिखाई गई है।

कहां कमी रह गयी?

कमी की बात करें तो इस बार सीरीज में मूसा (The Family Man 2 Review) की बेहद कमी नजर आई। शो के पहले सीजन में मासूम से दिखने वाले खूंखार आतंकवादी मूसा ने जो तबाही मचाई और जिस तरह सस्पेंस पेश किया था, वह इस बार कहीं कम दिखी। हां, राजी ने भले ही मूसा की जगह ली पर वह आक्रामकता इस बार के सीजन में पहले से कम दिखी।यही नही कहीं-कहीं पर ऐसा लगा कि शो में कुछ सीन्स को जबरदस्ती डाला गया है।

ओवरऑल

कुल मिलाकर देखा जाए तो द फैमिली मैन 2 एक बेहतरीन सीरीज है। लगभग 50-50 म‍िनट के 9 एप‍िसोड को आराम से देखा जा सकता है। द फैमिली मैन का दूसरा सीजन आपको बोरियत महसूस नहीं होने देगी।

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