पिछले साल जब चीन के वुहान प्रांत से covid-19 की शुरुआत हुयी तब इसके प्रारंभिक लक्षणों में सर्दी-खांसी, सामान्य बुखार तथा सरदर्द को ही मुख्य लक्षण बताया गया था। हालाँकि कुछ गंभीर मामलों में सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याओं को भी गौर किया गया है। जैसे-जैसे इस वायरस ने पूरी दुनिया में पैर पसारने शुरू किये इसके लक्षण भी बदलते चले गये। कहीं-कहीं डायरिया, स्वाद का चले जाना, सूंघने की शक्ति का क्षीण होना, रक्त वाहिकाओं में छोटे-छोटे थक्कों का जमना आदि जैसे लक्षण देखे गये हैं। इन सभी लक्षणों के अलावा इस दूसरी लहर में एक और लक्षण सामने आया है जिसे चिकित्सीय भाषा में साइलेंट हाय्पोक्सिया या हैप्पी हाय्पोक्सिया के नाम से भी जाना जाता है ।
हाय्पोक्सिया से तात्पर्य है रक्त में ऑक्सीजन का स्तर अपने निम्नतम बिंदु पर चले जाना। जैसा कि हम जानते हैं सामान्यतः हमारे शरीर में ऑक्सीजन सैचुरेशन 95% से ऊपर होना चाहिए ताकि शरीर के महत्वपूर्ण अंग भलि-भांति अपना कार्य करते रहे, किन्तु दूसरी लहर के COVID-19 के मरीजों में यह देखा गया है कि ऑक्सीजन सैचुरेशन खतरनाक तरीके से 40% से नीचे चला गया है फलस्वरूप शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को ऑक्सीजन न मिल पाने के कारण मरीज़ की मौत तक हो जाती है।

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हैप्पी हाय्पोक्सिया

हैप्पी हाय्पोक्सिया वो स्थिति है जब किसी संकर्मित व्यक्ति को ये लगता है कि उसके शरीर में ऑक्सीजन की कोई कमी नही है परन्तु अंदर ही अंदर शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। इसमें व्यक्ति सामान्यतः स्वस्थ प्रतीत होता है लेकिन कई बार ऑक्सीजन सैचुरेशन अचानक से 40% से नीचे चले जाने के कारण व्यक्ति की मौत तक हो जाती है । कोरोना वायरस के इस डबल म्युटेंट वैरिएंट ने ज्यादातर युवाओं को अपनी चपेट में लिया हुआ है और उनकी मौत का कारण बन रहा है। बेहतर होगा सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन्स का पालन करें , समय समय पर हाथ धोते रहे एवं अति आवश्यक होने पर ही मास्क लगा कर घर से निकलें।

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